राजस्थान: थाने के बाहर सैकून खान की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या, परिवार ने धार्मिक पहचान पर निशाना बनाए जाने का जताया शक; पुलिस ने नकारा सांप्रदायिक एंगल
अलवर: राजस्थान के अलवर जिले में बड़ौदामेव पुलिस थाने के बाहर 24 सितंबर की सुबह 40 वर्षीय सैकून खान की सिर पर पत्थर से बार-बार हमला कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने हर्ष मूर्तिकार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। सैकून के परिवार का कहना है कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और उन्हें शक है कि दाढ़ी, टोपी और पहनावे से उनकी मुस्लिम पहचान स्पष्ट होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। दूसरी तरफ पुलिस ने अब तक हत्या के पीछे सांप्रदायिक मकसद होने से इनकार किया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है और आरोपी की मानसिक स्थिति की चिकित्सकीय जांच कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
अपडेट: 28/9/2026, 5:34:49 pm IST
60 सेकंड में समझें
- राजस्थान के अलवर में सनसनीखेज हत्या
- टायर खरीदने बाजार गए थे सैकून
- परिवार ने धार्मिक पहचान पर जताया शक
- पुलिस ने सांप्रदायिक एंगल से किया इनकार
- SIT कर रही है मामले की जांच
टायर खरीदने बाजार गए थे सैकून खान
पुलिस और कई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सैकून खान अलवर के बड़ा वास गांव के रहने वाले थे और खेती-बाड़ी करते थे। 24 सितंबर की सुबह वह मोटरसाइकिल का नया टायर खरीदने के लिए बड़ौदामेव बाजार गए थे। उनके साथ गांव के नूर मोहम्मद भी थे, जिन्हें उन्होंने एक बैंक के पास उतारा था।
करीब सुबह 10 बजे सैकून जब बड़ौदामेव पुलिस स्टेशन के सामने से गुजर रहे थे, तभी आरोपी हर्ष मूर्तिकार ने कथित तौर पर उन्हें रोका, मोटरसाइकिल से नीचे गिराया और सड़क पर पड़े पत्थर से उनके सिर पर कई वार किए। गंभीर रूप से घायल सैकून को पहले बड़ौदामेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और वहां से अलवर रेफर किया गया, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई।
सैकून तीन बच्चों के पिता थे। परिवार के मुताबिक उनके दो बेटियां और एक बेटा है।
परिवार ने धार्मिक पहचान की वजह से हत्या का जताया शक
सैकून के छोटे भाई इरशाद खान ने कहा कि परिवार को हत्या की वजह समझ नहीं आ रही क्योंकि सैकून की किसी से पुरानी दुश्मनी नहीं थी।
इरशाद ने आरोप लगाया कि उनके भाई दाढ़ी रखते थे और टोपी पहनते थे, जिससे उनकी मुस्लिम पहचान साफ दिखाई देती थी। परिवार को शक है कि यही पहचान हमले की वजह हो सकती है। हालांकि, अभी तक जांच में इस आरोप की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इसे स्वीकार नहीं कर रही है।
सैकून के पिता नसरू खान ने The Wire को बताया कि उनका बेटा मोटरसाइकिल के पास था, तभी उस पर अचानक भारी पत्थर से हमला किया गया। उनके अनुसार सैकून गिर गए और पैर मोटरसाइकिल के नीचे फंस गए, जिसके बाद हमलावर ने उनके सिर पर लगातार वार किए।
परिवार ने पुलिस की भूमिका पर भी उठाए सवाल
परिवार और कुछ स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि पुलिस स्टेशन के इतने करीब हमला होने के बावजूद सैकून को समय रहते क्यों नहीं बचाया जा सका।
इरशाद खान ने आरोप लगाया कि हमला थाने के बाहर हुआ, फिर भी कोई पुलिसकर्मी समय पर उनके भाई को बचाने नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों और परिजनों ने इसी मुद्दे को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
मेव पंचायत के प्रमुख शेर मोहम्मद मेव ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि उन्हें जानकारी मिली थी कि आरोपी घटना से पहले पुलिस स्टेशन के अंदर था और पिता से विवाद के बाद उसे पुलिस के पास लाया गया था। उन्होंने दावा किया कि बाहर निकलते समय आरोपी ने किसी की हत्या करने की धमकी भी दी थी।
हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
अलवर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रियंका रघुवंशी ने कहा कि इस आरोप की जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक जांच में आरोपी के घटना से पहले थाने के अंदर होने की बात साबित करने वाला कोई तथ्य नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि जिस स्थान पर हमला हुआ, वह थाने के अंदर से सीधे दिखाई नहीं देता और मदद के लिए आवाज सुनने पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
पुलिस बोली—दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे
पुलिस का कहना है कि सैकून खान और आरोपी हर्ष मूर्तिकार के बीच पहले से कोई पहचान या दुश्मनी सामने नहीं आई है।
इंस्पेक्टर राजकुमार ने The Indian Express से कहा कि दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे। पुलिस ने धार्मिक पहचान को हमले की वजह मानने से इनकार किया है।
अलवर एसपी सुधीर चौधरी ने भी कहा कि पूछताछ में आरोपी ने किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने की बात नहीं कही। पुलिस इसे फिलहाल किसी पूर्व रंजिश से जुड़ा हमला नहीं मान रही है और सांप्रदायिक एंगल से भी इनकार कर रही है।
आरोपी की मानसिक स्थिति पर पुलिस का दावा, मेडिकल जांच अभी बाकी
पुलिस अधिकारियों ने आरोपी के व्यवहार के आधार पर उसके मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की आशंका जताई है। हालांकि इसे किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष के रूप में अभी स्थापित नहीं किया गया है।
एडिशनल एसपी प्रियंका रघुवंशी के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद आरोपी कथित तौर पर चिल्ला रहा था, पुलिस को धमकियां दे रहा था और अपने पिता को मारने जैसी बातें कह रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस केवल उसके व्यवहार के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाल रही और उसकी मानसिक स्थिति डॉक्टरों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
26 सितंबर को UNI की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने आरोपी की वास्तविक मानसिक स्थिति की चिकित्सकीय जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जांच जयपुर में कराए जाने की तैयारी है।
परिवार के आरोप पर पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस ने परिवार के इस संदेह को नकारा है कि सैकून की हत्या मुस्लिम पहचान की वजह से हुई।
अतिरिक्त एसपी प्रियंका रघुवंशी ने कहा कि परिवार द्वारा शुरुआती तौर पर दी गई शिकायत में भी धार्मिक पहचान के कारण हत्या किए जाने का आरोप दर्ज नहीं था। पुलिस के मुताबिक मामले में हत्या का केस दर्ज किया गया है और आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा चुका है।
इसलिए फिलहाल यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि हत्या धार्मिक नफरत के कारण ही की गई थी। परिवार ने ऐसी आशंका जताई है, जबकि पुलिस इसे नकार रही है और हत्या का वास्तविक मकसद जांच का विषय है।
हत्या के बाद प्रदर्शन, SIT जांच की मांग
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिवार के सदस्य बड़ौदामेव थाने और अलवर जिला अस्पताल के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने अलवर-भरतपुर मार्ग भी जाम किया।
परिजनों और स्थानीय संगठनों ने निष्पक्ष जांच, परिवार को मुआवजा, सरकारी सहायता और मामले की जांच के लिए SIT गठित करने जैसी मांगें उठाईं।
इसके बाद अलवर पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया। 26 सितंबर की UNI रिपोर्ट के मुताबिक SIT ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल से सबूत एकत्र किए हैं।
अब तक क्या स्पष्ट है?
उपलब्ध पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट है कि 24 सितंबर को बड़ौदामेव पुलिस स्टेशन के पास सैकून खान पर पत्थर से घातक हमला हुआ और आरोपी हर्ष मूर्तिकार को पुलिस ने पकड़ लिया। परिवार ने धार्मिक पहचान और पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
वहीं पुलिस का कहना है कि पीड़ित और आरोपी की पहले से कोई पहचान या रंजिश नहीं थी और अभी तक सांप्रदायिक मकसद साबित नहीं हुआ है। आरोपी की मानसिक स्थिति को लेकर भी फिलहाल पुलिस की आशंका है, कोई अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष नहीं।
28 सितंबर तक उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक हत्या का वास्तविक मकसद अभी जांच के दायरे में है और SIT की जांच जारी है।
स्रोत और पठन नोट
यह सामान्य पठन के लिए मूल रीडर गाइड है। इसे ताज़ा घटना की रिपोर्ट या सत्यापित फैक्ट-चेक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
