CEC ज्ञानेश कुमार, PM मोदी-अमित शाह समेत कई लोगों के खिलाफ तहरीर; FIR की मांग, शिकायत की रिसीविंग मिली…!
नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर पूर्व न्यायाधीश मनोज कुमार, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भानु प्रताप, अधिवक्ता बलराज मलिक समेत कई अधिवक्ताओं ने पुलिस को एक विस्तृत तहरीर देकर FIR दर्ज करने और मामले की जांच करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार पुलिस ने उनकी तहरीर प्राप्त कर उसकी रिसीविंग भी दे दी है।
अपडेट: 3/10/2026, 7:07:55 pm IST
60 सेकंड में समझें
- SIR को लेकर दिल्ली में पुलिस को तहरीर दी गई।
- पूर्व जज मनोज कुमार समेत कई वकील मौजूद रहे।
- CEC ज्ञानेश कुमार समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए।
- FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
- पुलिस ने शिकायत की रिसीविंग दे दी है, FIR अभी दर्ज नहीं हुई।
तहरीर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, चुनाव आयोग की DG (IT) सीमा खन्ना, पूर्व चुनाव अधिकारियों तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल समेत कई लोगों के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
चुनाव आयोग की आधिकारिक डायरेक्टरी के अनुसार वर्तमान में ज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं। सीमा खन्ना चुनाव आयोग में Director General (IT) के पद पर सूचीबद्ध हैं। (Election Commission of India)
तहरीर में क्या आरोप लगाए गए?
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में संविधान और चुनाव संबंधी कानूनों के दायरे से बाहर जाकर कदम उठाए गए। तहरीर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, Form 6 से जुड़े कथित बदलाव, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और BLOs पर कथित दबाव जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
पूर्व जज मनोज कुमार ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि SIR जिस तरीके से की जा रही है, उसके लिए चुनाव आयोग के पास वैधानिक अधिकार नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया। ये शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप और उनकी कानूनी व्याख्या हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 के अपने आदेश में SIR को संविधान के अनुच्छेद 324, Representation of the People Act, 1950 और Registration of Electors Rules, 1960 के तहत चुनावी रोल की शुद्धता बनाए रखने की प्रक्रिया बताया था। आयोग के आदेश में यह भी कहा गया था कि इससे पहले विभिन्न वर्षों में intensive revision की प्रक्रियाएं की गई थीं। (Election Commission of India)
Form 6 को लेकर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता पक्ष ने Form 6 से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल खड़े किए हैं और आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने इसमें ऐसे बदलाव किए जिनकी वैधानिकता की जांच होनी चाहिए।
चुनाव आयोग के मौजूदा Voters’ Service Portal पर Form 6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए उपलब्ध है। SIR से संबंधित अलग enumeration और declaration प्रक्रिया भी पोर्टल पर दिखाई गई है।
CEC और Election Commissioners को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर विवाद
मनोज कुमार ने अपने बयान में Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 16 का भी जिक्र किया। उनका तर्क है कि इस धारा के तहत मिलने वाली सुरक्षा केवल आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित कार्यों तक सीमित है और शिकायत में लगाए गए कथित आपराधिक कृत्य उस दायरे में नहीं आते।
2023 के कानून में धारा 16 CEC और Election Commissioners के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए या कथित रूप से किए गए कार्यों के संबंध में कानूनी संरक्षण का प्रावधान करती है। किसी विशेष आरोप या परिस्थिति पर यह संरक्षण लागू होता है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायिक प्रक्रिया में ही हो सकता है। (India Code)
“तहरीर स्वीकार की गई, अब जांच की मांग”
शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक उनका तत्काल उद्देश्य पुलिस को शिकायत सौंपना और लगाए गए आरोपों की कानून के मुताबिक जांच कराना है।
मनोज कुमार ने कहा कि उनकी मांग है कि पुलिस तहरीर के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करे और आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए।
तहरीर सौंपे जाने के दौरान अधिवक्ता भानु प्रताप, अधिवक्ता बलराज मलिक सहित बड़ी संख्या में अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। मौके पर मीडिया कर्मियों और पुलिसकर्मियों की भी मौजूदगी रही।
महत्वपूर्ण रूप से, तहरीर की रिसीविंग मिलने का अर्थ FIR दर्ज होना नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस चरण पर पुलिस को शिकायत दी गई है और शिकायतकर्ता पक्ष ने FIR दर्ज करने की मांग की है।
SIR अभी भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हिस्सा
चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची के सत्यापन और पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड अद्यतन करने की प्रक्रिया के रूप में चला रहा है। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर 2026 की SIR प्रक्रिया और उससे जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
