IAS से इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल का ऐलान: किसी दल के साथ नहीं, जनता के साथ करेंगी राजनीति; यूपी से होगी शुरुआत
उत्तर प्रदेश को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हुए पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे नहीं जाएंगी और जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करना चाहती हैं।
अपडेट: 29/9/2026, 6:18:14 pm IST
वीडियो रिपोर्ट देखें ↗60 सेकंड में समझें
- पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान किया।
- कहा— किसी दल के साथ नहीं, लोगों के साथ राजनीति करूंगी।
- स्कूल, सड़क और सरकारी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- पेपर लीक, रोजगार और AI को लेकर युवाओं की चिंता उठाई।
- अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करेंगी।
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अपने अगले कदम को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। 29 सितंबर को जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उनका अगला रास्ता राजनीति है और इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
दिव्या मित्तल ने कहा कि वह ऐसे लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी समस्याएं सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पातीं या पहुंचने के बावजूद उनका समाधान नहीं होता।
• स्कूल की मंजूरी मिली, लेकिन निर्माण नहीं हुआ
अपने प्रशासनिक कार्यकाल का एक अनुभव साझा करते हुए मित्तल ने मिर्जापुर के लहुरिया दह क्षेत्र का जिक्र किया। उनके अनुसार, वहां एक महिला ने पानी, पेंशन या मकान के बजाय गांव में पांचवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग की थी।
मित्तल ने कहा कि स्कूल को मंजूरी मिलने के बावजूद करीब तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम, धन और स्वीकृति मौजूद थी, तो काम क्यों नहीं हुआ। यह विवरण उनकी ओर से सार्वजनिक वीडियो संदेश में दिया गया है।
• जमीन के पट्टे और कब्जे का मामला भी उठाया
मित्तल ने अपने राजस्व विभाग के कार्यकाल का एक अन्य मामला बताते हुए दावा किया कि एक भूमिहीन व्यक्ति को सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया था।
उनके मुताबिक, मामले की रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने और संबंधित स्तर पर कार्रवाई होने के बाद भी कब्जा दिलाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। मित्तल ने इस उदाहरण के जरिए प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों को समय पर न्याय मिलने का सवाल उठाया।
• सड़क, पुल और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर सवाल
मित्तल ने अपने संबोधन में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों, पुलों और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में बारिश के दौरान गांवों का संपर्क प्रभावित होता है, जबकि खराब सड़कों और गड्ढों से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास समस्याओं और संबंधित फाइलों की जानकारी होने के बावजूद कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती। सड़क और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को उन्होंने अपने प्रस्तावित राजनीतिक अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया।
• पेपर लीक और युवाओं के भविष्य का जिक्र
पूर्व IAS अधिकारी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और लंबे समय तक भर्ती प्रक्रियाएं अटकने जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक तैयारी करने वाले युवाओं के सामने अनिश्चितता पैदा होती है और उनके भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोजगार के भविष्य पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि तकनीकी बदलावों के कारण आने वाले वर्षों में नौकरियों की प्रकृति बदल सकती है और इस विषय पर नीति-निर्माण के स्तर पर अधिक चर्चा की जरूरत है।
• उद्देश्य केवल नेता बदलना नहीं
अपने राजनीतिक एजेंडे को लेकर मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक नेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव की बात करना है।
उन्होंने इसे “इरादे, न्याय, फिक्र और सोच की राजनीति” बताया और कहा कि राजनीति का केंद्र आम नागरिकों की समस्याएं होनी चाहिए।
• किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी
दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि फिलहाल वह किसी मौजूदा राजनीतिक दल के साथ राजनीति शुरू नहीं कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि वह लोगों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र मंच तैयार करना चाहती हैं। उन्होंने जाति और धर्म आधारित राजनीतिक समीकरणों से दूरी रखने की बात भी कही।
• राजनीतिक मुलाकात की खबर को बताया गलत
मित्तल ने अपने वीडियो में यह भी आरोप लगाया कि उनके इस्तीफे के बाद एक राजनीतिक नेता से उनकी कथित मुलाकात को लेकर गलत दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई और उनका मानना है कि इस तरह की बातें उन्हें सार्वजनिक सवाल उठाने से रोकने के उद्देश्य से फैलाई गईं।
इस दावे को मित्तल के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए; सार्वजनिक रिपोर्टों में भी इसे उनके बयान के तौर पर दर्ज किया गया है।
• उत्तर प्रदेश से होगी शुरुआत
मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हुए कहा कि उनकी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत यहीं से होगी।
उन्होंने शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों, मजदूरों, वकीलों, छात्रों और अभिभावकों सहित अलग-अलग वर्गों के लोगों से उनके प्रस्तावित मंच से जुड़ने की अपील की।
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने मिर्जापुर और संत कबीर नगर में जिलाधिकारी सहित उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम किया। अगस्त 2026 के अंत में उन्होंने IAS से इस्तीफा दिया था और सितंबर में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
अब उनके इस ऐलान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासनिक सेवा से बाहर आने के बाद वह सक्रिय राजनीति में काम करना चाहती हैं, लेकिन फिलहाल किसी स्थापित राजनीतिक दल के बजाय स्वतंत्र जन-आधारित मंच बनाने की बात कर रही हैं।
