सत्यशोधक समाज के मंच से बहुजन एकजुटता, बुद्ध और संविधान पर जोर, बोले— कमजोर समझने की भूल न करें
लखनऊ: सत्यशोधक समाज की ओर से लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें वक्ता ने बहुजन समाज, तथागत बुद्ध, डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अपनी बात रखी।
अपडेट: 30/9/2026, 5:10:50 pm IST

THE PLANET REPORT
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- लखनऊ में सत्यशोधक समाज का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
- वक्ता ने बहुजन एकता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
- बुद्ध, करुणा और अहिंसा का उल्लेख किया गया।
- अंबेडकर के संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात हुई।
- संगठित लोकतांत्रिक भागीदारी का आह्वान किया गया।
अपने संबोधन में वक्ता ने देश की सामाजिक संरचना को लेकर दावा किया कि भारत की बड़ी आबादी बहुजन समाज से आती है। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित तबकों पर अत्याचार नहीं होना चाहिए और करुणा, दया तथा अहिंसा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
मस्जिद-मंदिर विवाद का भी किया जिक्र
भाषण के दौरान वक्ता ने स्वामी प्रसाद मौर्य के उस चर्चित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें मंदिर-मस्जिद विवादों के संदर्भ में मंदिरों के नीचे बौद्ध मठ खोजने की बात कही गई थी।
वक्ता ने कहा, “तुम मस्जिद के नीचे मंदिर खोजोगे तो हम मंदिर के नीचे बौद्ध मठ खोजेंगे।” इसके बाद उन्होंने तथागत बुद्ध की विरासत का उल्लेख करते हुए भारत को बुद्ध की जन्मभूमि बताया और बौद्ध विचारधारा के वैश्विक प्रसार की चर्चा की।
‘करुणा और दया को कमजोरी न समझें’
संबोधन में वक्ता ने कहा कि धर्म अगर करुणा, दया और परोपकार सिखाता है तो इसे किसी समाज की कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमको हमारे तथागत बुद्ध ने तलवार उठाने के लिए मना किया है, इसलिए हमें कमजोर मत समझिए।”
वक्ता ने गरीबों और कमजोर वर्गों पर कथित अत्याचार का मुद्दा उठाते हुए सामाजिक समानता और न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।
बाबा साहेब के संविधान का किया उल्लेख
भाषण में डॉ. भीमराव अंबेडकर और भारतीय संविधान का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया। वक्ता ने कहा कि देश की व्यवस्था संविधान के मूल्यों और लोकतांत्रिक अधिकारों के आधार पर चलनी चाहिए।
उन्होंने जनभागीदारी और राजनीतिक बदलाव की बात करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर अपनी आवाज उठाते हैं तो शासन, नेतृत्व और राजनीतिक विचारधारा पर उसका प्रभाव पड़ सकता है।
संबोधन के अंत में वक्ता ने “जय हिंद” और “नमो बुद्धाय” के साथ अपनी बात समाप्त की।
